जयपुर के आम्रपाली सर्किल पर एक व्यक्ति् ने आरक्षण विरोध को लेकर किया आत्मदाह
एसएमएस में भर्ती
दिल्ली जाने की तैयारी
भारत माता के नाम पत्र लिखकर किया आत्मदाह
कई दिनों से परेशान थे विरोध प्रदर्शनों को लेकर
रघुवर प्रसाद गुप्ता है नाम
वैशाली नगर में है मेडिकल की दुकान
एसएमएस के बर्न यूनिट के दूसरे तल कमरा नंबर 202 में भर्ती
चौराहे के पास लगे ट्रांसफ़ॉर्मर के पीछे खड़ा होकर खुद को लगाई आग
80 प्रतिशत बर्न है रघुवीर प्रसाद।
परिजन दिल्ली ले जाने की कर रहे तैयारी
भाजपा शासित राजस्थान में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यकर्ता ने जयपुर में आत्मदाह कर जान देने की कोशिश की है। पीड़ित के दोस्त ने बताया कि वह 2 अप्रैल के भारत बंद से
बहुत दिनों से बेहद तनाव में था।
इससे परेशान होकर वह आत्मदाह करने पर मजबूर हो गया। इसमें अरएसएस कार्यकर्ता बुरी तरह झुलस गए।
RSS कार्यकर्ता ने जयपुर में खुद को लगाई आग !!
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सोशल मीडिया पर फैलाया उन्माद, दुष्प्रचार, आउट रेज और नफरत की अति कितना नुकसान करती है इसका उदाहरण सामने है ! खबर जयपुर से है जहाँ वह 2 अप्रैल के भारत बंद के बाद से बहुत दिनों से मानसिक तनाव रहे संघ के एक क्रयकर्ता ने खुद को आग लगाकर ख़ुदकुशी की कोशिश की है !
इसी नफरत, दुष्प्रचार और प्रोपगंडे ने राजसमंद के शंभूलाल रैगर को एक वीभत्स क़ातिल के रूप में परिवर्तित कर दिया था, और उसने ख़ास सोशल मीडिया पर अपलोड करने के लिए एक बेगुनाह मुसलमान का लाइव क़त्ल कर डाला !!
अगर सोशल मीडिया पर ये उन्माद, नफरत, दुष्प्रचार, प्रोपगंडे और हेट स्पीच न रोकी गयी तो ये मंच समाज, देश और लोकतंत्र के लिए भावी संकट का स्त्रोत बनेगा !!
यह घटना रविवार (8 अप्रैल) की है। अनुसूचित जाति/जनजाति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के प्रति विरोध जताने के लिए दलित संगठनों ने बंद का आह्वान किया था।
इस दौरान कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन हुए थे। हिंसा में कुल 11 लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा सरकारी और निजी संपत्ति को व्यापक पैमाने पर नुकसान पहुंचाया गया था। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था।
मेरठ में कई बसों को आग के हवाले कर दिया गया था। इसके अलावा जगह-जगह ट्रेन का परिचालन ठप कर दिया गया था। इससे हजारों की तादाद में यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा था।
भाजपा ने हिंसा के लिए विपक्षी दलों को जिम्मेदार ठहराया था। वहीं, कांग्रेस, बसपा और सपा जैसे दलों ने भाजपा सरकार पर एससी-एसटी कानून को कमजोर करने का आरोप लगाया था।
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